वर्तमान समाज मे आज हमारे आवश्यकता और स्वतंत्रता , घृणा , प्रेम , मृत्यु और जीवन के बीच मे संघर्ष छिड़ा हुआ है ! दूसरी तरफ हमारी जन्म भूमि हिंदुस्तान में अमीरी - गरीबी , शोषक - शोषित के बीच संघर्ष बना हुआ है , और अपनी समस्याओं से घिरा हुआ है मनुष्य जितना समाधान खोजता है पर उनकी समस्याए हल नहीं होती बल्कि और ज्यादा जठिल हो जाती है! समस्याए तभी सुलझ सकती है जब हम हर व्यक्ति के विकास और राष्ट्रहित को सर्वोपरी होकर के कार्य करें ! यही वह तरीका है जिसकी सहायता से हम अपने आप को चकाचौध , और भीड़ से अलग रख सकते है ! हमने अपने अतीत और वर्तमान को सत्य के झरोखे से देखा और पाया है की मनुष्य को कोई विकास अपने आप नहीं होता है , ऐसी कोई प्रणाली या स्त्रोत नहीं है जो प्राकृतिक नियमों के अनुसार घटित ना होती हो इसलिए मनुष्य का विकास तभी हो सकता है जब वह इसके लिए जागरूक हो !

      देखा जाये तो आज हमारा देश कहने को तो आज़ाद है हम कई क्षेत्रो के विकास पर भी पहुंच गए है मगर आम आदमी कई पहलुओं पर आज भी संघर्ष कर रहा है ! परिस्थिति यह है की गरीब और गरीब होते जा रहे धनी और धनी , भ्रष्टाचार चरम पर है, हर जगह भाई भतीजा वाद चल रहा है, राजनैतिक सिर्फ अपनी स्वार्थ की रोटिया सेकने में लगे हुए है , आम आदमी का हर कदम संघर्ष से घिरा हुआ है , इन परिस्थितियों का विश्लेषण करने के बाद मै आम आदमी के संघर्ष की राह में अपना हर कदम मिला के उसके साथ चलूँगा !


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